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कीलक स्त्रोतम (Kilak Stotram in Hindi & Sanskrit)




 ॥ अथ कीलकम् ॥


ॐ इस श्रीकीलक मंत्र के शिव ऋषि, अनुष्टुप् छन्द, श्री महासरस्वती देवता हैं। 
श्री जगदम्बा की प्रीति के लिए सप्तशती के पाठ के जप में इसका विनियोग किया जाता है। 
ॐ नम श्चण्डिकायै॥


ॐ चण्डिका देवी को नमस्कार है। 
मार्कण्डेय जी कहते हैं – विशुद्ध ज्ञान ही जिनका शरीर है, जो कल्याण-प्राप्तिके हेतु हैं तथा अपने मस्तक पर अर्ध चन्द्र का मुकुट धारण करते हैं, उन भगवान शिव को नमस्कार है ॥1॥


मन्त्रों का जो अभिकीलक है, अर्थात् मन्त्रों की सिद्धि में विघ्न उपस्थित करने वाले शाप रूपी कीलक का जो निवारण करने वाला है, उस सप्तशती स्तोत्र को सम्पूर्ण रूप से जानना चाहिये। (और जानकर उसकी उपासना करनी चाहिये) यद्यपि सप्तशती के अतिरिक्त अन्य मन्त्रों के जप में भी जो निरन्तर लगा रहता है, वह भी कल्याण का भागी होता है ॥2॥

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