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वैदिक एवं पश्चिमी ज्योतिष का अंतर | A Detailed Comparative Study of Vedic and Western Astrology

 वैदिक एवं पश्चिमी ज्योतिष का अंतर

(A Detailed Comparative Study of Vedic and Western Astrology)


1. ज्योतिष का उद्देश्य और दार्शनिक आधार

ज्योतिष केवल भविष्य जानने की कला नहीं, बल्कि मानव जीवन को ब्रह्मांडीय नियमों के संदर्भ में समझने का विज्ञान है। वैदिक और पश्चिमी ज्योतिष—दोनों का मूल उद्देश्य मानव जीवन को दिशा देना है, किंतु उनका दार्शनिक दृष्टिकोण भिन्न है।
वैदिक ज्योतिष का आधार कर्म, पुनर्जन्म और मोक्ष की अवधारणा पर टिका है, जबकि पश्चिमी ज्योतिष मुख्यतः व्यक्तित्व विकास और मनोवैज्ञानिक समझ पर केंद्रित है।

2. वैदिक ज्योतिष की उत्पत्ति और विकास

वैदिक ज्योतिष की जड़ें भारतीय वेदों में निहित हैं। इसे ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है और यह वेदांगों में से एक है। प्राचीन ऋषियों ने ग्रहों और नक्षत्रों की वास्तविक आकाशीय स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन कर इस प्रणाली को विकसित किया।
वैदिक ज्योतिष का उद्देश्य केवल घटनाओं की भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि यह समझाना है कि व्यक्ति अपने कर्मों द्वारा अपने भाग्य को कैसे सुधार सकता है।

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