श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 18
सन्यास योग श्री गीता योग प्रकाश का अठारहवाँ और अंतिम अध्याय है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को संन्यास, त्याग, कर्म, ज्ञान, भक्ति, स्वधर्म, त्रिगुण, बुद्धि, धृति, सुख तथा मोक्ष का समग्र और अंतिम उपदेश दिया है। इस अध्याय में गीता के सम्पूर्ण संदेश का सार प्रस्तुत करते हुए बताया गया है कि निष्काम कर्म, ईश्वर-समर्पण और अपने स्वधर्म का पालन ही जीवन में परम शांति और मोक्ष का मार्ग है। इस लेख में अध्याय 18 (सन्यास योग) का सरल हिन्दी में भावार्थ, आध्यात्मिक विवेचन तथा दैनिक जीवन में उसकी व्यावहारिक उपयोगिता प्रस्तुत की गई है।
