श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 10
विभूति योग
विभूतियों का वर्णन सुन्दर, करते प्रभुवर अपने।
करें नित्य अभ्यास योग तो, आती हैं सब अपने॥
यह तो अलौकिक शक्ति महा, प्रभुवर का है वरदान।
अष्ट सिद्धियां कहते इनको, आठ ही हीं परधान ॥221॥
आणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति और प्राकाम्य ।
और ईशित्व वशित्व कहावें, भक्त को हो नहिं काम्य ॥
रिद्धि सिद्धि प्रेरइ बहु भाई, बुद्धिहिं लोभ दिखावहीं आई।
होई बुद्धि जो परम सयानी, तिन्ह तन चितवन अनहित जानी ।।222॥