ज्योतिष का मूल ज्ञान
ज्योतिष में सूर्य राशि और चंद्र राशि को दो प्रमुख आधार माना गया है, जो हमारे जीवन के बाहरी और आंतरिक दोनों पहलुओं को प्रभावित करती हैं।
ज्योतिष का मूल ज्ञान
ज्योतिष में सूर्य राशि और चंद्र राशि को दो प्रमुख आधार माना गया है, जो हमारे जीवन के बाहरी और आंतरिक दोनों पहलुओं को प्रभावित करती हैं।
वृषभ राशि, राशि चक्र की दूसरी राशि, पृथ्वी तत्व और स्थिर प्रकृति (Fixed
Sign) का प्रतीक है। पृथ्वी तत्व इसकी ऊर्जा को
स्थिर,
व्यावहारिक, शांत,
संतुलित और ज़मीन से जुड़ा बनाता है। इस राशि का स्वामी
शुक्र ग्रह है, जो सौंदर्य, आनंद, भौतिक सुख, कला, संगीत, प्रेम, कोमलता, रचनात्मकता और आकर्षण का कारक माना जाता है। शुक्र ग्रह और
पृथ्वी तत्व का संयुक्त प्रभाव वृषभ राशि के जातक को धैर्य, स्थिरता, विश्वसनीयता
और गहन भावनात्मकता प्रदान करता है।
वृषभ व्यक्ति जीवन को जल्दबाजी में नहीं जीते। उनका स्वभाव धीमे लेकिन अत्यंत
निश्चित कदमों वाला होता है। वे हर कार्य को सुविचारित ढंग से करते हैं और बिना
ठोस आधार के किसी निर्णय में प्रवेश नहीं करते। इनका धैर्य जीवन की कठिन
परिस्थितियों में भी इन्हें स्थिर बनाए रखता है। इन्हें अचानक परिवर्तन पसंद नहीं
आते,
क्योंकि यह लोग उद्देश्यपूर्ण, सुरक्षित और दीर्घकालिक योजनाएँ पसंद करते हैं।
वृषभ जातक अपने विचारों, संबंधों और
निर्णयों में अडिग रहते हैं। यह वही व्यक्ति होता है, जो एक बार किसी लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हो जाए, तो चाहे परिस्थितियाँ बदल जाएँ, परंतु यह अपने मार्ग पर दृढ़ रहते हैं। इनके भीतर की पृथ्वी
ऊर्जा इन्हें अत्यंत व्यावहारिक, तर्कसंगत और
वास्तविकता से जुड़ा बनाती है। जीवन में स्थिरता, शांति और उपलब्धि—ये तीन शब्द वृषभ राशि के मूल स्वभाव को सर्वोत्तम रूप में
परिभाषित करते हैं।
राशि चक्र की प्रथम राशि के रूप में मेष को आरंभ, ऊर्जा और सृजनात्मक प्रेरणा का प्रतिनिधि माना गया है। यह
वह बिंदु है जहाँ से जीवन की गति प्रारंभ होती है। अग्नि तत्व की यह राशि पुरुषत्व, उत्साह और सक्रियता का प्रतीक है। जिन व्यक्तियों का जन्म
सूर्य मेष राशि में होता है, या जिनका लग्न
मेष होता है, उनके व्यक्तित्व, विचार और कर्म—इन तीनों पर मंगल ग्रह का बहुत गहरा प्रभाव
देखा जाता है। मंगल शक्ति, पराक्रम, साहस, निर्णय-क्षमता
और युद्धनीति का अधिपति ग्रह है, जिसके कारण
मेष राशि के जातक प्रायः कर्मप्रधान, निडर और तेजस्वी होते हैं।
मेष राशि का विस्तार राशि चक्र के पहले 30 अंशों तक माना जाता है और इसमें अश्विनी, भरणी और कृत्तिका नक्षत्र के चरण आते हैं। इन नक्षत्रों के गुणों का सम्मिलित
प्रभाव मेष जातक को गति, बुद्धि, कर्मठता, स्वतंत्रता और
कभी-कभी आवेगशीलता प्रदान करता है। मेष का प्रतीक मेष (भेड़ा) है, जो सीधा, निर्भीक और
सदैव आगे बढ़ने वाला होता है। यह तीक जातकों के स्वभाव की मूल प्रकृति को स्पष्ट
करता है।
शारीरिक बनावट
मेष राशि या लग्न वाले जातकों का शरीर प्रायः सुदृढ़, ऊर्जावान और आकर्षक होता है। इनके चेहरे पर हल्की लालिमा, चमकदार दृष्टि और तेज भाव देखा जा सकता है। अग्नि तत्व की
सक्रियता इनके व्यवहार तथा शरीर दोनों में स्पष्ट दिखाई देती है। इनकी आँखें
भावनाओं को तुरंत प्रदर्शित करती हैं और इनके चेहरे पर एक स्वाभाविक आत्मविश्वास
झलकता है।
सिर, चेहरा और शरीर का ऊपरी भाग विशेष रूप से मजबूत होता है। बहुत से मेष जातकों के माथे या सिर पर कोई तिल, निशान या पुराने घाव का चिन्ह देखा जाता है, जो मंगल की साहसिकता और जोखिम लेने वाले स्वभाव का संकेत माना जाता है। इनकी चाल तेज होती है, आवाज स्पष्ट और व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली होता है। कार्य करते समय इनका ध्यान इतने गहन रूप से केंद्रित हो जाता है कि इनके चेहरे पर दृढ़ विश्वास और अटूट निश्चय स्पष्ट दिखाई देता है।