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शिव चालीसा (Shiva Chalisa)

शिव चालीसा (Shiva Chalisa)



।। दोहा।।

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

संकट मोचन हनुमान अष्टक (Sankat Mochan Hanuman Ashtak) (Hindi / English with Meaning)

संकटमोचन हनुमानाष्टक

संकट मोचन हनुमान अष्टक, जिसे हनुमान अष्टक के नाम से भी जाना जाता है, श्री हनुमान को समर्पित एक हिंदी भजन है। संकट मोचन हनुमान अष्टकम (संकट मोचन नाम तिहारो) तुलसीदास द्वारा लिखा गया था। अष्टक, या अष्टकम, का शाब्दिक अर्थ है आठ और प्रार्थना में भगवान हनुमान की स्तुति में आठ छंद होते हैं और भजन एक दोहा के साथ समाप्त होता है। अधिकांशतः हनुमानजी के मंदिरों में, हनुमान चालीसा के बाद इस संकट मोचन हनुमान अष्टक का पाठ किया जाता है। यह मंत्र न केवल इसे बोलने वाले लोगों को लाभ पहुंचाता है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों को भी लाभ पहुंचाता है। यह मंत्र मानसिक विश्राम में मदद करता है और व्यक्ति के परिवार में शांति की भावना लाता है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से वयस्कों और बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार होता है। ऐसे मामले भी हैं जहां यह मंत्र अदालती मामलों और मुद्दों में सकारात्मक परिणाम लाने में सफल साबित हुआ है। संकट मोचन हनुमान अष्टक का जाप व्यक्ति और उसके प्रियजनों की सामान्य भलाई के लिए किया जाता है। इसके पाठ से  सभी बाधाएं आसानी से दूर हो जाती हैं और व्यक्ति को अपने पसंदीदा क्षेत्र में सफलता पाने में कोई बाधा नहीं आती। संकटमोचन हनुमान अष्टक का जाप व्यक्ति की शिक्षा में भी सफलता की गारंटी देता है और लोगों को उनकी इच्छा के अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करता है।

हनुमान चालीसा अर्थ सहित (Hanuman Chalisa with Meaning)


दोहा 

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

Shree Guru Charan Saroj Raj, Nij Man Mukar Sudhari,
Barnau Raghuvar Bimal Jasu, Jo dayaku Phal Chari

Budhi heen Tanu Janike, Sumirow, Pavan Kumar,
Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi, Harahu Kalesh Bikaar

अर्थ

श्री गुरु के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।

हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कार दीजिए।

With the dust of Guru's Lotus feet, I clean the mirror of my mind and then narrate the sacred glory of Sri Ram Chandra, The Supereme among the Raghu dynasty. The giver of the four attainments of life.

Knowing myself to be ignorent, I urge you, O Hanuman, The son of Pavan! O Lord! kindly Bestow on me strength, wisdom and knowledge, removing all my miseries and blemishes.

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