अध्याय-७
ज्ञान विज्ञान-योग
परमात्मा हैं नित्य और अविनाशी मायातीत।
पृथ्वी बायु अग्नि जल नभ, मन बुद्धि अहं परतीति ॥
अपरा प्रकृति कहाती उनकी,परा प्रकृति है चेतन ।
इन दोनों से पैदा होते, सब प्राणी जड़ चेतन ॥136॥
सभी सृष्टि उत्पन्न व लय हो, परम प्रभू के कारण ।
संरचना सब गुथी हुई है, उनसे सदा अकारण ॥
जल में रस भी परम प्रभू हैं, रवि चन्द्र अग्नि में तेज।
नभ में शब्द, पुरुष में पराक्रम, वेदहिं “ॐ” सतेज ॥137॥