जातिवाद पर एक प्रेरणादायक कहानी
बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक विद्वान पंडित अपनी पत्नी के साथ रहता था। पंडित धार्मिक अनुष्ठानों और शास्त्रों का बड़ा ज्ञाता माना जाता था, लेकिन उसके मन में ऊँच-नीच और छुआछूत की भावना गहराई तक बैठी हुई थी।
एक दिन दोपहर के समय पंडित को बहुत तेज़ प्यास लगी। उसने अपनी पत्नी से पानी माँगा।
पत्नी ने संकोच से कहा,
"घर में पानी समाप्त हो गया था, इसलिए मैं पड़ोस से पानी ले आई हूँ।"
