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पूजा-पाठ में प्याज और लहसुन क्यों वर्जित हैं? सनातन धर्म, शास्त्र और विज्ञान की दृष्टि

 

पूजा-पाठ के भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता? — सनातन परंपरा, शास्त्र और विज्ञान की दृष्टि से एक शोधपूर्ण अध्ययन

सनातन धर्म में भोजन केवल शरीर का पोषण करने का साधन नहीं माना गया है, बल्कि उसे मन, बुद्धि और आत्मिक जीवन से भी जोड़ा गया है। यही कारण है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने भोजन को केवल स्वाद या पोषण के आधार पर नहीं, बल्कि उसके मानसिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभावों के आधार पर भी वर्गीकृत किया। भारतीय परंपरा में प्रचलित उक्ति "जैसा अन्न, वैसा मन" इसी गहन चिंतन का परिणाम है।

सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य के जीवन काल के16 संस्कार

सनातन धर्म के अनुसार  मनुष्य के जीवन काल के सोलह संस्कार होते है आइये जानते हैं इन सोलह  संस्कारों का मतलब और इनका महत्व।

 


गर्भाधानं पुंसवनं सीमन्तो जातकर्म च।

नामक्रियानिष्क्रमणेऽन्नाशनं वपनक्रिया॥

कर्णवेधो व्रतादेशो वेदारम्भक्रियाविधिः।

केशान्तः स्नानमुद्वाहो विवाहाग्निपरिग्रहः॥

त्रेताग्निसंग्रहश्चेति संस्काराः षोडश स्मृताः।

 

1. गर्भाधान संस्कार

हमारे शास्त्रों में मान्य सोलह संस्कारों में गर्भाधान पहला है। गृहस्थ जीवन में प्रवेश के उपरान्त प्रथम क‌र्त्तव्य के रूप में इस संस्कार को मान्यता दी गई है। गृहस्थ जीवन का प्रमुख उद्देश्य श्रेष्ठ सन्तानोत्पत्ति है। 

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