पूजा-पाठ के भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता? — सनातन परंपरा, शास्त्र और विज्ञान की दृष्टि से एक शोधपूर्ण अध्ययन
सनातन धर्म में भोजन केवल शरीर का पोषण करने का साधन नहीं माना गया है, बल्कि उसे मन, बुद्धि और आत्मिक जीवन से भी जोड़ा गया है। यही कारण है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने भोजन को केवल स्वाद या पोषण के आधार पर नहीं, बल्कि उसके मानसिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभावों के आधार पर भी वर्गीकृत किया। भारतीय परंपरा में प्रचलित उक्ति "जैसा अन्न, वैसा मन" इसी गहन चिंतन का परिणाम है।