श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 12
भक्तियोग श्री गीता योग प्रकाश का बारहवाँ अध्याय है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण भक्ति के स्वरूप, सच्चे भक्त के गुणों तथा ईश्वर-प्राप्ति के सरल मार्ग का वर्णन करते हैं। इस अध्याय में सगुण और निर्गुण उपासना का विवेचन करते हुए बताया गया है कि निष्काम, अनन्य और समर्पित भक्ति मनुष्य को परमात्मा के निकट ले जाती है। साथ ही भगवान उन दिव्य गुणों का भी उल्लेख करते हैं जो एक आदर्श भक्त में होने चाहिए। प्रस्तुत लेख में अध्याय 12 (भक्तियोग) का सरल हिन्दी भावार्थ, आध्यात्मिक विवेचन तथा दैनिक जीवन में उसकी व्यावहारिक उपयोगिता सहज भाषा में प्रस्तुत की गई है
