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SREE GEETA YOG PRAKASH श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 4

SREE GEETA YOG PRAKASH
श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय - 4

अध्याय - 4
ज्ञान - कर्म - संन्यास योग 

ज्ञान - कर्म - संन्यास योग 

 

ज्ञान कर्म संन्यास योंग का, वर्णन बहुत पुराना 

पहले प्रभु ने रवि को सुनाया, तनय मनु ने जाना ।।

इक्ष्वाकु थे तनय मनु के मनु ने उन्हें बताया 

इसी भांति राजश्री सभी, और मुनियों ने भी पाया ।।23॥

 

फिर से भगवन ने अर्जुन को, यही ज्ञान बतलाया 

हुआ प्रचार पुन: तन मन से, हम सबने भी पाया ।।

बार - बार के जन्म - मरण का, चक्र सदा चलता है 

पर कुछ याद नही रहता है, इससे यह खलता है ।।24॥

 

 

भगवत कृष्ण महायोगेश्वर, उनकी स्मृति नित नूतन 

मायापति माया वश में रख, करे कार्य सम्पादन ।।

माया के वश जन्म - मरण से, रहते नर अज्ञानी 

मायापति  का जन्म दिव्य, वे अमरात्मा के ज्ञानी।।25॥

 

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