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श्रद्धात्रय विभाग योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 17

  श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 17

श्रद्धात्रय विभाग योग श्री गीता योग प्रकाश का सत्रहवाँ अध्याय है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण श्रद्धा के तीन स्वरूप—सात्त्विक, राजसिक और तामसिक—का विस्तृत विवेचन करते हैं। इस अध्याय में श्रद्धा के अनुसार मनुष्य के आहार, यज्ञ, तप, दान और जीवन-व्यवहार का विश्लेषण किया गया है तथा यह बताया गया है कि जैसी श्रद्धा होती है, वैसा ही मनुष्य का व्यक्तित्व और जीवन बनता है। प्रस्तुत लेख में अध्याय 17 (श्रद्धात्रय विभाग योग) का सरल हिन्दी भावार्थ, आध्यात्मिक विवेचन और व्यावहारिक जीवन में उसकी उपयोगिता सहज भाषा में प्रस्तुत की गई है। 

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