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ध्यान योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 6 - (हिन्दी पदानुवाद)


अध्याय - 6

ध्यान योग

प्रथम योग अर्जुन विषाद का, द्वितीय सांख्य का योग

अमर आत्मा है नश्वरतन में, यही सांख्य का योग

आत्म ज्ञान करके बुद्धि जब, स्थिरता है पाती।

द्वंद द्वैत मिट जाते है सब, समत्वता हैं आती 76


सब दुःखों का नाश होय, जब प्राप्त ब्रह्म निर्वाण

बुद्धि स्थिर होती समाधि में, यहीं शास्त्र परमाण  

आत्मज्ञान पूरन समाधि में, स्थितप्रज्ञ तब ही हो।

ऐसे साधक समाधि को ही, ईश्वर भी परिचित हो॥77

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