भारतीय वैदिक परंपरा में यदि किसी मंत्र को सर्वाधिक लोकप्रिय, सर्वमान्य और लोककल्याणकारी कहा जाए, तो निस्संदेह गायत्री मंत्र का नाम सबसे पहले आता है। करोड़ों लोग प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक इसका जप करते हैं। कोई इसे आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम मानता है, कोई मानसिक शांति का स्रोत, तो कोई सद्बुद्धि प्राप्त करने की सर्वोच्च प्रार्थना।
किन्तु जितनी अधिक इसकी लोकप्रियता बढ़ी है, उतनी ही अधिक इसके संबंध में भ्रांतियाँ और जिज्ञासाएँ भी सामने आई हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया और मौखिक परंपराओं में अनेक प्रकार की बातें सुनने को मिलती हैं—कोई कहता है कि बिना दीक्षा गायत्री मंत्र का जप नहीं करना चाहिए, कोई इसे केवल पुरुषों के लिए बताता है, तो कोई महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान जप को लेकर अलग-अलग मत प्रस्तुत करता है। इसी प्रकार जप का सही समय, संख्या, दिशा, माला, स्नान, रात्रि जप और बच्चों द्वारा गायत्री मंत्र के अभ्यास जैसे अनेक प्रश्न सामान्य लोगों के मन में उठते रहते हैं।