हरतालिका तीज व्रत: पूजा विधि, व्रत कथा, नियम और बिहार की लोकपरंपरा
हरतालिका तीज हिंदू धर्म की प्रमुख तीज परंपराओं में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र संबंध, माता पार्वती की तपस्या, दृढ़ संकल्प और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है।
हरतालिका तीज का व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की मंगलकामना के लिए रखा जाता है। अविवाहित कन्याएं भी अच्छे और मनोनुकूल जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।
हालांकि इसे प्रायः महिलाओं का व्रत माना जाता है, लेकिन पूजा-विधान के संदर्भ में इसे केवल महिलाओं तक सीमित मानना आवश्यक नहीं है। मुख्य धार्मिक परंपरा भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना पर केंद्रित है।
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। अलग-अलग वर्षों में इसकी अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख बदलती रहती है। इसलिए इस लेख को किसी एक वर्ष की तारीख से जोड़ने के बजाय तिथि-आधारित रखा गया है।