सनातन धर्म में भगवान शनिदेव का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। वे केवल एक ग्रह ही नहीं, बल्कि न्याय, अनुशासन, कर्म और सत्य के प्रतीक देवता भी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शनिदेव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें कर्मफलदाता तथा न्याय के देवता कहा जाता है। सप्ताह का शनिवार भगवान शनिदेव को समर्पित माना जाता है और इस दिन श्रद्धालु उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
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दीपावली पूजन विधि
दीपावली धन और समृद्धि का त्यौहार हैं, जिसे आमतौर पर दीवाली भी कहा जाता है, हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाकर रंग बिरंगे बत्तियों और दीपों से सजाते हैं। दीपावली पूजन में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाज होते हैं। यहां कुछ सामान्य पूजन विधियाँ दी जा रही हैं:
इस त्यौहार में गणेश भगवान और माता लक्ष्मी के साथ ही साथ धनाधिपति भगवान कुबेर, सरस्वती और काली माता की भी पूजा की जाती है। सरस्वती और काली भी माता लक्ष्मी के ही सात्विक और तामसिक रूप हैं। जब सरस्वती, लक्ष्मी और काली एक होती हैं तब महा लक्ष्मी बन जाती हैं।
व्रत एवं पूजन विधि - करवा चौथ व्रत विधि
करवा चौथ
उत्तर-पूर्वी भारत में प्रशिद्ध करवा चौथ के व्रत वैवाहित स्त्रियों में प्रशिद्ध है| यह व्रत निर्जला ही किया जाता है। इस दिन समस्त स्त्रियाँ अपने-अपने पतियों की लम्बी उम्र के लिए भगवान शिव और गौरी की आराधना करतीं है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को मनाया जाता है। भारत के कई स्थानों पर इस पर्व को करवा के नाम से भी जाना जाता है|
करवा चौथ व्रत विधि
श्री करक चतुर्थी का यह व्रत करवा चौथ के नाम से प्रसिद्ध है। पंजाब , उतरप्रदेश , मध्यप्रदेश और राजस्थान का प्रमुख पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने पति के रक्षार्थ इस व्रत को रखती है। गोधुली की वेला यानी चंद्रयोदय के एक घंटे पूर्व श्री गणपति एवं अम्बिका गोर, श्री नन्दीश्र्वर, श्री कार्तिकेयजी , श्री शिवजी फ्रदेवी माँ पार्वतीजी के प्रतिप , प्रधान देवी श्री अम्बिका पार्वतीजी और
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