श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 12
भक्तियोग श्री गीता योग प्रकाश का बारहवाँ अध्याय है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण भक्ति के स्वरूप, सच्चे भक्त के गुणों तथा ईश्वर-प्राप्ति के सरल मार्ग का वर्णन करते हैं। इस अध्याय में सगुण और निर्गुण उपासना का विवेचन करते हुए बताया गया है कि निष्काम, अनन्य और समर्पित भक्ति मनुष्य को परमात्मा के निकट ले जाती है। साथ ही भगवान उन दिव्य गुणों का भी उल्लेख करते हैं जो एक आदर्श भक्त में होने चाहिए। प्रस्तुत लेख में अध्याय 12 (भक्तियोग) का सरल हिन्दी भावार्थ, आध्यात्मिक विवेचन तथा दैनिक जीवन में उसकी व्यावहारिक उपयोगिता सहज भाषा में प्रस्तुत की गई है
स्वर्गीय विजय शंकर पाण्डेय को श्रद्धांजलि
श्री गीता योग प्रकाश के रचयिता स्वर्गीय विजय शंकर पाण्डेय ने श्रीमद्भगवद्गीता के अमर संदेश को सरल, भावपूर्ण और काव्यात्मक शैली में जन-जन तक पहुँचाने का अनुकरणीय प्रयास किया। उनकी यह कृति गीता के गूढ़ आध्यात्मिक सिद्धांतों को सहज भाषा में प्रस्तुत कर प्रत्येक पाठक के हृदय में धर्म, भक्ति, कर्म और आत्मज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करती है। यह अमूल्य रचना उनकी आध्यात्मिक साधना, साहित्यिक प्रतिभा और गीता के प्रति अटूट श्रद्धा का जीवंत प्रमाण है। उनकी पावन स्मृति को विनम्र श्रद्धांजलि।










