वैदिक ज्योतिष की प्रचलित परंपरा में जन्म नक्षत्र के आधार पर व्यक्ति का गण निर्धारित किया जाता है। अष्टकूट गुण मिलान में देव गण, मनुष्य गण और राक्षस गण — इन तीन श्रेणियों का उल्लेख मिलता है। इनमें मनुष्य गण का संबंध सामान्यतः मानवीय स्वभाव, व्यवहारिक जीवन, सामाजिक संबंधों और सांसारिक उत्तरदायित्वों की पारंपरिक व्याख्या से जोड़ा जाता है।
मनुष्य गण के विषय में लोगों की जिज्ञासा रहती है कि इस गण में जन्म लेने वाले व्यक्तियों का स्वभाव कैसा माना जाता है, उनमें कौन-से गुण और कमजोरियाँ बताई जाती हैं, वे परिवार तथा सामाजिक जीवन में किस प्रकार व्यवहार कर सकते हैं और विवाह मिलान में इस गण का क्या महत्व है।
इस विषय को समझने के लिए केवल लोकप्रिय ज्योतिषीय धारणाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। मनुष्य गण के नक्षत्र-वर्गीकरण, पौराणिक संदर्भों, सनातन दर्शन और बाद की ज्योतिषीय व्याख्याओं को उनके उचित संदर्भ में समझना आवश्यक है।