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विश्वरूपदर्शन योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 11
भक्तियोग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 12
श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 12
क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभाग योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 13
गुणत्रयविभाग योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 14
श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 14
पुरुषोत्तम योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 15
श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 15
दैवासुरसम्पद्विभाग योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 16
श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 16
दैवासुरसम्पद्विभाग योग श्री गीता योग प्रकाश का सोलहवाँ अध्याय है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण मनुष्य के दैवी (श्रेष्ठ) और आसुरी (अधम) गुणों का गहन विवेचन करते हैं। इस अध्याय में निर्भयता, सत्य, दया, आत्मसंयम, क्षमा जैसे दैवी गुणों तथा अहंकार, क्रोध, लोभ, दंभ और हिंसा जैसे आसुरी स्वभावों का विस्तार से वर्णन किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि दैवी गुण मोक्ष की ओर ले जाते हैं, जबकि आसुरी प्रवृत्तियाँ मनुष्य के पतन का कारण बनती हैं। प्रस्तुत लेख में अध्याय 16 (दैवासुरसम्पद्विभाग योग) का सरल हिन्दी भावार्थ, आध्यात्मिक विवेचन तथा दैनिक जीवन में उसकी व्यावहारिक उपयोगिता सहज भाषा में प्रस्तुत की गई है।
श्रद्धात्रय विभाग योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 17
श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 17
सन्यास योग - श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 18
पूजा-पाठ में प्याज और लहसुन क्यों वर्जित हैं? सनातन धर्म, शास्त्र और विज्ञान की दृष्टि
पूजा-पाठ के भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता? — सनातन परंपरा, शास्त्र और विज्ञान की दृष्टि से एक शोधपूर्ण अध्ययन
सनातन धर्म में भोजन केवल शरीर का पोषण करने का साधन नहीं माना गया है, बल्कि उसे मन, बुद्धि और आत्मिक जीवन से भी जोड़ा गया है। यही कारण है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने भोजन को केवल स्वाद या पोषण के आधार पर नहीं, बल्कि उसके मानसिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभावों के आधार पर भी वर्गीकृत किया। भारतीय परंपरा में प्रचलित उक्ति "जैसा अन्न, वैसा मन" इसी गहन चिंतन का परिणाम है।
शनि दोष एवं उसके निवारण के उपाय: धार्मिक, ज्योतिषीय एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण
सनातन धर्म में भगवान शनिदेव का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। वे केवल एक ग्रह ही नहीं, बल्कि न्याय, अनुशासन, कर्म और सत्य के प्रतीक देवता भी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शनिदेव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें कर्मफलदाता तथा न्याय के देवता कहा जाता है। सप्ताह का शनिवार भगवान शनिदेव को समर्पित माना जाता है और इस दिन श्रद्धालु उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
Angel Numbers क्या हैं? 01–30 तक अंकों का अर्थ, इतिहास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
Angel Numbers क्या हैं?
Angel Numbers वे संख्याएँ या संख्या-पैटर्न हैं जो किसी व्यक्ति को बार-बार दिखाई देते हैं, जैसे—
- 11:11
- 22:22
- 333
- 444
- 777
- 01:01
- 05:05
आधुनिक Numerology (अंक ज्योतिष) तथा New Age Spirituality में माना जाता है कि ऐसे दोहराए जाने वाले अंक व्यक्ति को प्रेरणा, मार्गदर्शन या आत्मचिंतन का संदेश देते हैं।
हालाँकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इनकी व्याख्या अलग-अलग परंपराओं और लेखकों में भिन्न हो सकती है।
इस लेख में हम इस विषय को इतिहास, लोकप्रिय मान्यताओं और विज्ञान—तीनों दृष्टिकोणों से समझेंगे।
Angel Numbers का इतिहास
बहुत से लोग मानते हैं कि Angel Numbers हजारों वर्ष पुराने हैं, जबकि वास्तविकता इससे कुछ अलग है।
1. प्राचीन अंकशास्त्र की पृष्ठभूमि
संख्याओं के रहस्यमय अर्थों का विचार प्राचीन काल से मिलता है।
सपने में हाथी पर चढ़ना: शुभ संकेत या भविष्य का संदेश? जानिए पारंपरिक स्वप्न-फल
सपने में हाथी पर चढ़ना – क्या अर्थ है?
सपनों की दुनिया सदियों से मनुष्य के लिए रहस्य और जिज्ञासा का विषय रही है। भारतीय ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र तथा पारंपरिक मान्यताओं में प्रत्येक सपने का एक विशेष प्रतीकात्मक अर्थ बताया गया है। यदि आपने सपने में स्वयं को हाथी पर सवार देखा है, तो इसे सामान्यतः अत्यंत शुभ स्वप्न माना जाता है।
हाथी शक्ति, बुद्धिमत्ता, धैर्य, समृद्धि और राजसी वैभव का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में हाथी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी है। इसलिए सपने में हाथी पर चढ़ना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत माना जाता है।










